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जल जागरण: आप कितने पानी में हैं?

जल-जागरण एक डेटा-ड्रिवेन कोशिश है यह समझने की कि देश के विभिन्न राज्यों में भू-जल की स्थिति क्या है। यह पहला और वर्तमान संस्करण केवल उत्तर प्रदेश राज्य पर केंद्रित है। अगले कुछ महीनों में इस प्रोजेक्ट में और भी राज्य शामिल होंगे। अपने ज़िले में भूजल की स्थिति जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।

भू-जल की वर्तमान स्थिति और भविष्य के दृष्टिकोण को समझना काफ़ी कठिन हो सकता है क्योंकि भू-जल की मात्रा और गुणवत्ता तय करने के कई कारक होते हैं। अक्सर इन कारकों के बारे में डेटा केंद्र और राज्य सरकारों के पास टुकड़ों में बँटा रहता है और इस कारण भू-जल की समस्या का हम सही संदर्भ में आकलन नहीं कर पाते।

जल-जागरण एक कोशिश है इन सभी कणों का एक वेब्सायट पर संकलन करके उनको संदर्भ अनुसार समझने की। इस प्रोजेक्ट से यह उम्मीद है की हम भू-जल के गिरते स्तर को सही मायनों में समझ सकें और उस पर सकारात्मक कार्यवाही कर सकें।

स्टार रेटिंग्स की कार्यप्रणाली

वार्षिक वर्षा, वन आवरण, बढ़ती जनसंख्या, ज़मीन की पानी सोख लेनी की क्षमता और कॉनक्रिटाईज़ेशन ऐसे कुछ कारण हैं जिनसे एक जगह की भू-जल मात्रा प्रभावित होती है। इस प्रोजेक्ट में इन सभी कारकों की पड़ताल की गई है और उनका मूल्यांकन एक स्टार से लेकर पाँच स्टार तक किया गया है। एक स्टार का मतलब सबसे ख़राब और पाँच स्टार सबसे अच्छा। इस प्रोजेक्ट के संदर्भ में, प्रत्येक कारक की मान्यताओं ओर सीमाओं का विवरण नीचे किया गया है।

कॉनक्रिटाईज़ेशन (आधार: UP State Statistical Survey 2015)

मान्यता: वो सारा भूमि क्षेत्रफल जो की ‘लैंड अदर देन ऐग्रिकल्चर’ के तहत वर्गिक्र्त है उसे कॉनक्रिटाईज़्ड माना गया है। इस श्रेणी के अंतर्गत यही मापदंड हर ज़िले की स्टार रेटिंग्स का आधार है।

तरीका: हर ज़िले के कुल क्षेत्र का कितना प्रतिशत हिस्सा ‘लैंड अदर देन ऐग्रिकल्चर’ के तहत वर्गिक्र्त है इसकी गणना की गयी। फिर, परिणामी नतीजों की रेंज को पाँच बराबर प्रतिशतक में बाँटा गया। वो ज़िले जो सबसे कम २० प्रतिशतक में रहे उन्हें एक-स्टार रेटिंग्स दी गयी और तदनुसार दो से पाँच रेटिंग्स दी गयी।

वन आवरण (आधार: UP State Statistical Survey 2015)

मान्यता: वो सारा भूमि क्षेत्र फल जो की ‘ऐरिया अंडर फ़ॉरेस्ट’ के तहत वर्गिक्र्त है उसको वन आवरण माना गया है। इस श्रेणी के अंतर्गत यही मापदंड हर ज़िले की स्टार रेटिंग्स का आधार है।

तरीका: हर ज़िले के कुल क्षेत्र का कितना प्रतिशत हिस्सा ‘ऐरिया अंडर फ़ॉरेस्ट’ के तहत वर्गिकरत है इसकी गणना की गयी। फिर, परिणामी नतीजों की रेंज को पाँच बराबर प्रतिशतक में बाँटा गया। वो ज़िले जो सबसे कम २० प्रतिशतक में रहे उन्हें एक-स्टार रेटिंग्स दी गयी और तदनुसार दो से पाँच रेटिंग्स दी गयी।

जनसंख्या (आधार: Census of India)

तरीक़ा: हर ज़िले का दशक २००१-२०११ का जनसंख्या वृद्धि दर निकाला गया। परिणामी नतीजों की रेंज को पाँच प्रतिशतक में बाँटा गया। जो ज़िले ८० प्रतिशतक से ऊपर की श्रेणी में आए उन्हें एक स्टार की रेटिंग दी गयी और तदनुसार दो से पाँच की रेटिंग निर्धारित की गयी।

वर्षा (आधार: India Meteorological Department, or IMD)

तरीका: वर्ष २०१२ से २०१६ के दौरान वार्षिक वर्षा के घाटे/अधिशेष को आधार माना गया है। सभी ज़िलों के घाटे की औसत निकाली गया। फिर, परिणामी नतीज़ों को पाँच प्रतिशतक में बाँटा गया। वो ज़िले जिनमे घाटा सबसे कम २० प्रतिशतक में आया, उन्हें पाँच-स्टार रेटिंग्स दी गयी और तदनुसार चार से एक रेटिंग्स निर्धारित की गयी।

भू-जल निकालने का कठिनाई स्तर (आधार: Central Ground Water Board)

तरीका: भू-जल की गहराई के आधार पर ज़िले २ श्रेणियों में बँटे हैं। जिन ज़िलों में भू-जल १० ‘मीटर बिलो ग्राउंड लेवल’, अथवा ‘mbgl’, से ऊपर मौजूद है उन जिलों में भू-जल निकालने के कठिनाई स्तर को ‘आसान’ माना गया है। जिन जिलों में भू-जल १० mbgl से ज़्यादा गहराई में है वहाँ ‘मुश्किल’ माना गया है। ये थिंक-टैंक PRS की इस मान्यता पर आधारित है की १० मीटर से अधिक गहराई से भू-जल निकालना मैन्यूली संभव नहीं है और इस काम के लिए मोटर की अवश्यक्ता होती है। -

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