JalJeevan by JagranNews

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पड़ताल

संवाददाता

2018-03-21T17:14:00

जलजागरण

इस प्रोजेक्ट में भू-जल के वर्तमान स्तर के अलावा इन चार और मापदंड पर ज़िलों का भवि

इस प्रोजेक्ट में भू-जल के वर्तमान स्तर के अलावा इन चार और मापदंड पर ज़िलों का भविष्य के दृष्टिकोण से मूल्यांकन किया गया है -

कान्क्रटाइज़ेशन, क्योंकि एक क्षेत्र का जितना ज़्यादा हिस्सा कान्क्रटाइज़्द होता है, वर्षा और इकट्ठा हुए पानी का ज़मीन में रिसना मुश्किल हो जाता है।

जनसंख्या विकास दर, क्योंकि जितनी तेज़ी से आबादी बढ़ेगी उतनी ही तेज़ी से भू-जल पर दबाव बढ़ेगा।

वन-आवरण, क्योंकि वन-आवरण एक क्षेत्र की ज़मीन में पानी रिसने की क्षमता बढ़ाता है।

वार्षिक वर्षा, क्योंकि जितनी ज़्यादा वर्षा, ज़मीन में रिसने के लिए उतना ही ज़्यादा पानी उपलब्ध होता है।

दीर्घावधि वर्षा घाटे वाले ज़िले

दीर्घावधि वर्षा घाटे वाले ज़िले

वर्ष २०१२ से २०१६ में इन जिलों में वार्षिक वर्षा का घाटा सबसे ज़्यादा रहा - औरिया, फ़र्रुख़ाबाद, गौतम बुद्ध नगर, ग़ाज़ियाबाद, कौशाम्बी, कुशीनगर, महराजगंज, मैनपुर, माउ, पीलीभीत और रामपुर। ग़ौरतलब है की इन मे से निम्नलिखित यह चार ज़िले मँझले सूचकांक पर सभी मापदंड पर सबसे ख़राब मूल्यांकित किए गए हैं।

वर्षा भू-जल रीचार्ज करने का एकल सबसे महत्वपूर्ण कारक है। स्वाभाविक है की जिन क्षेत्रों में वार्षिक वर्षा अत्याधिक घाटे में हैं, वहाँ कृत्रिम रूप से भू-जल रीचार्ज करने का प्रबंध करना होगा, जैसे की रेन्वॉटर हार्वेस्टिंग।

आबादी और कान्क्रटाइज़ेशन के मापदंड पर सबसे ख़राब ज़िले

आबादी और कान्क्रटाइज़ेशन के मापदंड पर सबसे ख़राब ज़िले

गौतम बुद्ध नगर, ग़ाज़ियाबाद और लखनऊ ज़िलों का दो महत्वपूर्ण मापदंड पर सबसे ख़राब प्रदर्शन रहा - आबादी और कान्क्रटाइज़ेशन। इन दोनो सूचकों पे यह तीन ज़िले सबसे ख़राब २० प्रतिशत में रहे। उत्तर प्रदेश सरकार भी इन तीन जिलों को “सीवीएरली अफ़ेक्टेड विद ग्राउंड्वॉटर डिप्लीशन” के वर्ग में आकती है (यह पढ़ें)।

कान्क्रटाइज़ेशन और वन आवरण मापदंड पर सबसे ख़राब मूल्यांकित ज़िले।

कान्क्रटाइज़ेशन और वन आवरण मापदंड पर सबसे ख़राब मूल्यांकित ज़िले।

अंबेडकर नगर, बल्लिया, ग़ाज़ीपुर, कुशीनगर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और वाराणसी जिलों में कान्क्रटाइज़ेशन सबसे ज़्यादा और वन-आवरण सबसे कम पाया गया। इन जिलों में ज़मीन में पानी रिसने की क्षमता सबसे कम है (और जानने के लिए यह पढ़ें)। अगर आलम यही रहा तो भविष्य में इन ज़िलों की भू-जल रीचार्ज करने की प्राकृतिक क्षमता पर भारी प्रभाव पड़ेगा और इन क्षेत्रों में कृत्रिम रूप से भू-जल रीचार्ज करने का प्रबंध करना होगा। घरेलू स्तर पे बारिश के पानी का संग्रहण करने के और प्रभावी क़दम उठाने होंगे।

सभी मापदंड पर सबसे ख़राब मूल्यांकित ज़िले

सभी मापदंड पर सबसे ख़राब मूल्यांकित ज़िले

उत्तर प्रदेश के इन चार जिलों को मँझले सूचकांक पर इस विश्लेषण में एक-स्टार, यानी सबसे ख़राब, रेटिंग दी गयी है - गौतम बुद्ध नगर, ग़ाज़ियाबाद, कौशाम्बी और कुशीनगर। कान्क्रटाइज़ेशन, वन आवरण, वार्षिक वर्षा और जनसंख्या विकास दर मापदंड की रेटिंग पर यह चार ज़िले सबसे ख़राब २० प्रतिशतक के वर्ग में रेट किए गए।

दशक २००१-२०११ में उपरोक्त चार जिलों की जनसंख्या का विकास दर सबसे अधिक था। राज्य सरकार के इस आधिकारिक आकलन के अनुसार बढ़ती आबादी एक क्षेत्र के भू-जल के स्तर पर गंभीर रूप से असर करती है। पूरे उत्तर प्रदेश राज्य की जनसंख्या इस दशक में २० प्रतिशत से बढ़ी। तुलना में, ग़ाज़ियाबाद की जनसंख्या ४२% से बढ़ी, गौतम बुद्ध नगर की ३७% और कौशाम्बी व कुशीनगर प्रत्येक की आबादी २३% से बढ़ी।

इन चार जिलों में जनसंख्या का घनत्व भी सामान्य से बहुत ज़्यादा है। सेन्संस २०११ के अनुसार उत्तर प्रदेश राज्य में जनसंख्या घनत्व था ८२९ व्यक्ति/कि.मि.2। तुलना में, ग़ाज़ियाबाद राज्य का सबसे ज़्यादा घनत्व वाला ज़िला है। यहाँ राज्य के सामान्य घनत्व से लगभग चार गुना घनत्व है (३९७१ व्यक्ति/कि.मि.2)। गौतम बुद्ध नगर का घनत्व है १२८६ व्यक्ति/कि.मि.2, कौशाम्बी का ८९९ व्यक्ति/कि.मि.2 और कुशीनगर का १२२ ७व्यक्ति/कि.मि.2।

यह चार जिलों कान्क्रटाइज़ेशन, वार्षिक वर्षा का घाटा और वन आवरण की रेटिंग पर भी सबसे ख़राब पाए गए। -

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