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By JagranNews
अगर ‘जल ही जीवन’ है, तो कहना होगा कि उत्तर प्रदेश के चार जिलों- गौतम बुद्ध नगर, ग

अगर ‘जल ही जीवन’ है, तो कहना होगा कि उत्तर प्रदेश के चार जिलों- गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, कौशाम्बी और कुशीनगर में भूजल के मौजूदा स्तर की वजह से खतरे की घंटी सुनाई दे रही है।

सूबे के बाशिंदों के लिए उपलब्ध जमीनी पानी से संबंधित एक पड़ताल में यह जानकारी मिली है। पता चला है कि इन चारों जिलों की सबसे ज्यादा खराब हालत को देखते हुए यहां भूजल स्तर बढ़ाने के लिए सरकारी महकमे को तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।

इन कारणों से घट रहा भूजल

इन कारणों से घट रहा भूजल

दिल्ली स्थित विशेषज्ञों के समूह पीआरएस इंडिया मुताबिक घरेलू इस्तेमाल की 50 फीसद शहरी और 85 फीसद ग्रामीण जरूरतों की पूर्ति भूजल के जरिये होती है। इससे साफ पता चलता है कि भूजल की अहमियत बहुत ज्यादा है।

गौतम बुद्ध नगर, गाज़ियाबाद, कौशाम्बी और कुशीनगर जिलों में भूजल स्तर की उपलब्धता का आकलन जनसंख्या वृद्धि, कंक्रीट से बने भवनों की संख्या में बढ़ोतरी और बारिश के पानी में कमी जैसे कारकों को ध्यान में रख कर किया गया है। इन चार जिलों से संबंधित आंकड़े न्यूनतम भूजल स्तर और बारिश की मात्रा संबंधी चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं।

जनसंख्या का दबाव

जनसंख्या का दबाव

पर्यावरणीय सूचना प्रणाली (एनविस) केंद्र में उत्तर प्रदेश सरकार के अपने आकलन के मुताबिक भी जनसंख्या दर की तेज बढ़ोतरी के मुकाबले भूजल स्तर उपलब्धता के गिरते स्तर को देखें, तो हालात गंभीर हैं। वर्ष 2001 और 2011 के बीच प्रदेश में जनसंख्या की दशकीय वृद्धि दर करीब 20 फीसद रही। लेकिन उपरोक्त चार जिलों की जनसंख्या वृद्धि दर प्रदेश की औसत 20 फीसद वृद्धि दर की तुलना में कहीं ज्यादा है। 2001 से 2011 के बीच जनसंख्या वृद्धि दर गाजियाबाद जिले की 42 फीसद, गौतम बुद्ध नगर जिले की 37 फीसद और कौशाम्बी तथा कुशीनगर जिलों की करीब 23 फीसद रही। बढ़ती जनसंख्या के दबाव के अलावा बारिश कम होने के कारण भूजल स्तर और भी नीचे चला गया। दरअसल, बारिश के पानी की मात्रा का भूजल स्तरों के बढ़ने-घटने पर सीधा असर पड़ता है।

कंक्रीट जंगल का विस्तार

कंक्रीट जंगल का विस्तार

कंक्रीट से बने भवनों के निर्माण में बढ़ोतरी को हम इन्हीं चार जिलों में शहरी विकास का सूचक मान सकते हैं। लेकिन नजदीकी परीक्षण के बाद हमें इस क्षेत्र में हुए पर्यावरणीय असंतुलन के रूप में पड़े गंभीर प्रभाव का पता चलता है। दरअसल, कंक्रीट निर्माण की मात्रा बढ़ने की वजह से बारिश के पाने के अवशोषण के लिए उपलब्ध जमीन घट जाती है। नतीजतन, इस क्षेत्र के रहवासियों के लिए उपलब्ध भूजल की मात्रा भी कम हो जाती है। जनसंख्या के दबाव के कारण उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में गौतम बुद्ध नगर, गाज़ियाबाद, कौशाम्बी और कुशीनगर में कंक्रीट से ढंकी जमीन का प्रतिशत सर्वाधिक है।

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